औरत के हक़ में
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�मेरी माँ को लोग पत्थर न मारे इसके लिए हमारी मदद करिए, हम नहीं चाहते हमारे खौफनाक सपने हकीकत बन जाएँ, हम सारी दुनिया के लोगों के सामने अपने हाँथ फैलाते हैं� ये शब्द पांच वर्षों से माँ से दूर भूख, प्यास और भय से बोझिल सकीना के बच्चों फसरैद और सज्जाद मोहम्मदी की है, जिनका बचपन कट्टरता से उपजे अंतहीन संत्रास की वजह से ख़त्म हो गया| सकीना के मामले में इरान सरकार द्वारा की जा रही ज्यादतियों का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि जब चार साल पहले विवाहेतर संबंधों के आरोप में उनकी गिरफ्तारी की गयी और उनके शरीर को कोड़ों से छलनी कर दिया गया उस वक़्त उनके पति जीवित थे, गिरफ्तारी के ही दौरान उनके पति की हत्या हो गयी तो न्यायालय ने उनके ऊपर लगे आरोपों की व्याख्या करते हुए उनको हत्या का आरोपी बना दिया| पांच दिनों पहले जब सज्जाद ने अपनी माँ से फोन पर बात की तो तो वो फोन पर बुरी तरह से डरी हुई थी, सज्जाद का कहना था कि अब जबकि मेरी माँ के मामले को लेकर पूरी दुनिया से विद्रोह के स्वर उठ रहे हैं, इरानी अधिकारियों का उत्पीडन और भी बढ़ गया है, उनका मानना है कि मेरा परिवार इरान की बदनामी के लिए उत्तरदायी है| सज्जाद बताता है कि पिछले दो हफ़्तों से हमारे परिवार के किसी भी सदस्य यहाँ तक कि उनके वकील को &2332;बकि उसकी मौत के फरमान पर अंतिम तौर पर दस्तखत किये जा चुके हैं, ईरान अपनी जिद्द छोड़ने को तैयार नहीं है, सकीना के पक्ष में उठने वाली हर आवाज अनसुनी की जा रही है| ये सवाल बार बार उठता है कि हिंदुस्तान से लेकर ईरान तक शरिया से लेकर खापों तक सकीनाओं की मौत का ये बर्बर फैसला कब तक होता रहेगा और कब तक आधी दुनिया के इन फैसलों पर आधी दुनिया चुप्पी साधी रहेगी|
आइये ,आप सभी से निवेदन है ,सकीना को रिहा किये जाने के लिए अपनी आवाज उठायें -
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